राजधानी चौपाल, हरियाणा (Haryana news) : स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में चल रहे निजी अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालकों के लिए निर्देश जारी हुए हैं। सभी जिला मुख्यालयों पर हुई बैठक में पीएनडीटी अधिनियम व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को लेकर चर्चा हुई। इनमें निजी अस्पतालों व पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालकों ने भाग लिया।
बैठक में पीसी पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन व जिले के लिंगानुपात में सुधार को लेकर निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए सिविल सर्जन डा. सुमन कोहली ने सभी निजी अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड केंद्रों से पीसी पीएनडीटी अधिनियम एवं अन्य लागू कानूनों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने व जिले के बाल लिंगानुपात में सुधार के लिए जिला प्रशासन के साथ सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया।
Haryana news : 15 जुलाई तक का दिया समय
एनएचआरसी विशेष मानिटर सदस्य बाल कृषण गोयल द्वारा उनके जींद दौरे में दिए गए निर्देशानुसार बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र अपने अस्पताल के मुख्य शीर्ष पर पीसी पीएनडीटी केंद्र का नाम, पंजीकरण संख्या व संबंधित चिकित्सक का हरियाणा मेडिकल काउंसिल (एचएमसी) पंजीकरण संख्या प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इसके लिए उन्हें 15 जुलाई तक का समय दिया गया है।
एनएचआरसी सदस्य के सुझावों के अनुरूप अल्ट्रासाउंड्र सीटी स्कैन, एमआरआइ व अन्य जांचों की अधिकतम दरें निर्धारित कर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने पर भी चर्चा हुई। निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने शीघ्र ही एक समान प्रस्तावित दर सूची प्रशासन को उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि 18 वर्ष से कम आयु की गर्भवती बालिका अल्ट्रासाउंड के लिए आती है तो ऐसे मामलों में पाक्सो अधिनियम सहित लागू कानूनी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
संबंधित अस्पतालों को ऐसे मामलों की सूचना स्थानीय पुलिस, जिला बाल संरक्षण अधिकारी व महिला एवं बाल विकास विभाग को देना सुनिश्चित करना होगा। इसके लिए संबंधित विभाग से संपर्क के लिए ई मेल भी सांझा की गई। लिंगानुपात सुधार के लिए सभी निजी अस्पतालों व मैटरनिटी होम को बेटी के जन्म पर परिवार को बधाई देने, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से संबंधित जागरूकता सामग्री प्रदर्शित करने, लिंग चयन निषेध संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करने व प्रत्येक माह अपने संस्थान के जन्म लिंगानुपात का विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।